तो तय है कि हमें होश में रहने की बीमारी है ...

कारवाँ फुटपाथ के मल-मूत्र में डूबे हिस्से परअगर एक आदमीअपने स्वप्न की गठरियां सजाता हैरात ढलेऔर चांदनी बिखरने लगती हैउससे फूटती उबकाई परऔर आखिरकार मुंह बाएंसो जाता है वहऔर यह दृश्य देख हम होश में हैंतो तय हैकि हमें होश में रहने की बीमारी हैकौन डरता है यहां पागल... [पूरी पोस्ट]
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[18 Mar 2010 01:38 AM]

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