ओ अफसर के शाही कुत्ते !
कुछ दिनों से घुटन से लग रही है ! बेशर्म डाकुओं के बीच काम करना असहनीय होता जा रहा है ! अफ़सोस तब होता है जब मामूली चोर अमीर बनकर हम जैसे फकीरों को चोर समझने लगते हैं , ऐसे में प्रतिकार करना आवश्यक हो जाता है , अन्याय सहना...
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सतीश सक्सेना
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[18 Mar 2010 01:25 AM]



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