हम किराये पर लेते हें विदेशी कोख

नारी का कविता ब्लॉग हम बहुत तरक्की कर रहें हेंपहले बेटियों को मारते थेबहुओ को जलाते थेअब तो हमकन्या भ्रूण हत्या करते हैदूर नहीं है वो समयजब हम फक्र से कहेगेपुत्र पैदा करने के लियेहम किराये पर लेते हेंविदेशी कोखकुछ पुराने कमेंट्स यहाँ देखे और अपनी बात भी वही कहे© 2008-10... [पूरी पोस्ट]
writer रचना
views
15
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
0
[18 Mar 2010 01:44 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix