मुहब्बत का मौसम
वो नज़्मजो कभीतुमने मुझ पर लिखी थीएक प्यार भरे रिश्ते सेआज बरसों बाद भीउस पर नज़र पड़ती है तोयूं लगता हैजैसेफिर से वही लम्हें लौट आए हैंवही मुहब्बत का मौसमवही चम्पई उजाले वाले दिनजिसकी बसंती सुबहेंसूरज की बनफशी किरनों सेसजी होती थींजिसकी सजीली दोपहरेंचमकती...
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फ़िरदौस ख़ान
नज़्म
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[18 Mar 2010 01:04 AM]



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