चेतक की समाधि से -3
भाग -१ व भाग -२ से आगे ............" एक दिन संवत १६३३ के जेष्ट सुदी २ , तारीख ३० मई १५७६ बुधवार के प्रभात काल में उनके शिविर में मंद स्वर में कुछ मंत्रणा सी हो रही थी | एक स्त्री -कंठ याचना भरे शब्दों में अनुनय कर रही थी - " मैं नाचना चाहती हूँ , जी भर...
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क्षत्रिय
स्व.श्री तन सिंह जी कलम से
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[17 Mar 2010 22:57 PM]



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