वो इश्क़ जो हमसे रूठ गया
वो इश्क़ जो हमसे रूठ गया, अब उसका हाल बताएँ क्या,कोई मेहर नहीं, कोई कहर नहीं, फिर सच्चा शेर सुनाएँ क्या।एक हिज़्र जो हमको ला-हक है, ता-देर उसे दुहराएँ क्या,वो जहर जो दिल में उतार लिया, फिर उसके नाज़ उठाएँ क्या।एक आग ग़म-ए-तन्हाई की, जो सारे बदन में फैल...
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अल्पना वर्मा
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[17 Mar 2010 22:30 PM]



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