पुरस्कार का बहिष्कार और अखिल-भारतीय अरण्य-रोदन

samwaadghar गधा ऐसे सम्मेलन में कोई पहली बार नहीं आया था। जब भी वह मानवता, ईमानदारी प्रेम वगैरह जैसी दकियानूसी, पुरातनपन्थी, आउट आॅफ डेट, आउट आॅफ फैशन हो चुकीं बातों का बोझा ढोते-ढोते थक जाता है, ऐसे ही किसी सम्मेलन की किसी कुर्सी पर बैठ कर थोड़ी देर सुस्ता लेता... [पूरी पोस्ट]
writer sanjaygrover

व्यंग्य

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[17 Mar 2010 14:23 PM]

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