तीन अधूरी लिखवाइयाँ
1एक पल जो नहीं गुजरा - उस पल को जीयूँ कैसे?वो मय जो नहीं ढलका - उस मय को पीयूँ कैसे?तुम जब भी आती हो, एक हूक सी उठती है.तुम पास नहीं हो क्युँ, ये जख्म सीयूँ कैसे?2टुकडा टुकडा दुःख समेट के, फटा हुआ विश्वास लपेटेबेचैनी की चादर ओढे़, तुम भी सोयी - हम भी...
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विकास कुमार
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[17 Mar 2010 14:23 PM]



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