संध्याराग के बाद अब मैं क्या गाऊं, नहीं, मम्मा, तुम बताओ!
टैरेस पर इतने लोगों को देखकर सोहा घबरा गई. ज्यादातर अनजाने चेहरे. पहली बात दिमाग में यही आई कि चुपचाप उल्टे पैर वापस लौट जाए. (उसी पल दिमाग में ब्लौंडी का बैलून भी पॉप-अप हुआ, ‘हां, लौट आओ वापस और आकर मेरा जीना हराम करो, राइट?’ ब्लौंडी का तकिया-कलाम...
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Pramod Singh
साहित्यिक झोला
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[17 Mar 2010 14:36 PM]



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