रघुवीर सहाय की तीन कविताएं

जनपद आज की कविता ने अपनी राह के लिए जिन पूर्ववर्ती कवियों से रोशनी पाई है, उनमें रघुवीर सहाय बेहद महत्वपूर्ण हैं। यहां उनकी तीन छोटी कविताएं प्रस्तुत हैं-।। मेरी बेटी।।दुबली थकी हारी एक छोकरी काम पर जाती थीदूर से मैंने उसे आते हुए देखापर जितनी देर में मैंने... [पूरी पोस्ट]
writer अरविन्द चतुर्वेद
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[17 Mar 2010 11:31 AM]

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