‘‘प्यारी प्राची’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
इतनी जल्दी क्या है बिटिया, सिर पर पल्लू लाने की।अभी उम्र है गुड्डे-गुड़ियों के संग,समय बिताने की।।(चित्र गूगल सर्च से साभार)मम्मी-पापा तुम्हें देख कर, मन ही मन हर्षाते हैं।जब वो नन्ही सी बेटी की, छवि आखों में पाते है।।जब आयेगा समय सुहाना, देंगे हम...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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[17 Mar 2010 10:54 AM]



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