तन्हाई के आलम में...

खुद पर है यकीं छू लेंगे आसमां मैं और मेरी तन्हाई अक्सर मिलकर बातें किया करते हैं...कि ये प्यार क्यों होता हैप्यार में ये दर्द क्यों होता हैउस दर्द में भी हल्का मजा क्यों होता हैकोई अपना नहीं फिर भी उसका इंतजार क्यों होता हैमैं और मेरी तन्हाई अक्सर मिलकर बातें किया करते हैं....क्यों... [पूरी पोस्ट]
writer विश्वनाथ सैनी
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[17 Mar 2010 09:22 AM]

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