यह कैसी प्रतीक्षा..

काव्य तरंग पल पल अविरलनिर्बाध सदा भावो मेंबहता रहता हैपग पग पर हर दममखमल साराहों में साथ वो रहता हैकण कण में पृथ्वी केजिसका अस्तित्वसमाहित हैत्रण त्रण के मूल मेंछुपा हुआउसका सन्देशकुछ कहता हैकस्तूरी से मृग का जूऐसा अपना भीनाता हैगिर गिर कर फिरउठजाने काजो हमको पाठ... [पूरी पोस्ट]
writer RaniVishal

कविता

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[17 Mar 2010 09:11 AM]

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