रोंडेवू
न पहुंचे हो जहांदुस्साहसी यूरोपीय यात्रियों के कदमया थम गया हो जहांसदैव चलता बौद्ध भिक्षुओं का जीवटघंटों थिर रहने वाला योगियों का प्राण भीजहां काँपता हो जिस जगह अभी अभी उर्वर हुईधरती का हरापन ही साक्षी होमैं वहीं मिलना चाहता हूँइससे पहले किकोई कीट पहुंचे...
[पूरी पोस्ट]
sanjay vyas
13
2
0
2
12
[17 Mar 2010 08:30 AM]



Shuffle








