'माला'वती की जय हो !
नोट पे नोट...हजार-हजार के हों या सौ-दो सौ के....नोटों की माया...नोटों की माला....हर तरफ माया की माया...हर तरफ मायाजाल....और महामाया अपनी माया को किसी भी कीमत टूटता हुआ नहीं देख सकती...5 करोड़ की माला पर इतना बवाल हुआ...इनकम टैक्स की जांच बैठ...
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मिथिलेश श्रीवास्तव
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[17 Mar 2010 05:56 AM]



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