विदेशी कंपनियां, दलाल व्यवस्था और गिरवी संप्रभुताः दो आख्यान
अभी संवाद प्रकाशन से आई मिशेल चोस्दुव्स्की की गरीबी का वैश्वीकरण पढ़ रहा था. पूरी दुनिया में साम्राज्यवाद के कसते शिकंजे की एक पड़ताल करने की कोशिश की है मिशेल ने. हालांकि उनके लेखे-जोखे में कुछ खामियां और गलतियां भी हैं, लेकिन कुल मिला कर एक शानदार और...
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Reyaz-ul-haque
आओ बहसियाएं
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[17 Mar 2010 05:29 AM]



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