जनपक्ष: शलाका को तमाचे के लिये आभार!
केदार जी…सच मानिये इस एक पुरस्कार को लौटा के आपने हमें वह ख़ुशी दी है जो सारे संकलनों को कई-कई बार पढ़कर नहीं मिलती। पहले पुरुषोत्तम अग्रवालने जब इस पुरस्कार को न लेने की घोषणा की तो ग्वालियर का रहवासी होने पर फ़क्र हो आया था…अब आपके निर्णय के बाद मूलतः...
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अशोक कुमार पाण्डेय
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[17 Mar 2010 04:11 AM]



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