तेरे पास
सुन तेरे चेहरे पर गुलाब सी खिली मधुर स्मित नज़र आती है मुझेजब तू दूर -बहुत दूरनिंदिया के आगोश मेंस्वप्नों के आरामगाह मेंविचरण कर रहा होता हैतेरे सीने के मचलते ज्वार यहीं भिगो जाते हैं मुझे मेरे तड़पते जज्बातों को तेरी...
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वन्दना
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[17 Mar 2010 02:45 AM]



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