यकीन
तुम्हारे यकीं का इंतजार करते करते अब थक चुकी हूं मैं फ़िर भी तुम्हें आया नहीं यकीं मुझ पर अब तक उससे तुम नहीं मेरा आत्म सम्मान टूटता है और मैं तुम्हें यकीन दिला के रहूंगी तब तलक जब तलक सांस में सांस रहेगी। अन्तिम सांस अंतिम क्षण तक तुम्हारे इंतजार में...
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JHAROKHA
कविता
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[17 Mar 2010 02:34 AM]



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