दौर - ए - बाज़ार, न देखा जाए
बदल डालेंगे साथ आ, अगर तुझसे भी। सूरत-ए- हाल को बीमार, न देखा जाए॥ब्लॉग पर बहुत दिनों बाद लौट रहा हूँ ....उम्मीद है सभी साथी बाखैरियत होंगे .... नयी ग़ज़ल है आप की नज़र कर रहा हूँ...हुस्न के हाथ में इश्तिहार, न देखा जाए।और ये दौर - ए - बाज़ार , न देखा जाए...
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Deepak Tiruwa
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[16 Mar 2010 23:45 PM]



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