दौर - ए - बाज़ार, न देखा जाए

naturica बदल डालेंगे साथ आ, अगर तुझसे भी। सूरत-ए- हाल को बीमार, न देखा जाए॥ब्लॉग पर बहुत दिनों बाद लौट रहा हूँ ....उम्मीद है सभी साथी बाखैरियत होंगे .... नयी ग़ज़ल है आप की नज़र कर रहा हूँ...हुस्न के हाथ में इश्तिहार, न देखा जाए।और ये दौर - ए - बाज़ार , न देखा जाए... [पूरी पोस्ट]
writer Deepak Tiruwa

ग़ज़ल

views
12
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
2
[16 Mar 2010 23:45 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix