छत्तीसगढ़ ३ और एक ग़ज़ल

योगेंद्र मौदगिल बढ़िया मंच जमा था रायपुर और आसपास के सभी मीडियाकर्मी व रंगकर्मी होली के रंग में रंगे मस्ती में सराबोर थे संचालक महोदय ने तुरंत मेरा नाम पुकार दिया अनिल भाई ने मुझे तिलक लगा टोपी पहनाई फिर मैंने कविता पढ़ी श्रोता दूसरे ही मूड में थे फिर भी कविता चल गई... [पूरी पोस्ट]
writer योगेन्द्र मौदगिल

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[16 Mar 2010 23:10 PM]

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