"युवाओं से है मेरी पुकार...सरदार भगत सिंह की कुछ पक्तियों से...."
आज आप को मैं कुछ उन पक्तियों से परिचय कराता हूँ जब सरदार भगत सिंह जेल में अपनी मंगेतर के याद में गाया करते थे. आजीवन तेरे फिराक जुदाई विछोट्र, विरह, नामिलन के कारण दिल का शीशा इतना कमजोर हो गया कि किसी फूल पत्ती या पराग कि चोट से टूट ना...
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Tej Pratap Singh
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[16 Mar 2010 21:18 PM]



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