प्यार का बुखार

मुरादाबादी अड्डा रात भर यादो का हंसी मंज़र देखा,हुई सुबहे तो वही टूटा हुआ घर देखा,वही खामोशी थी फ़ैली चारो तरफ,वही तकिया वही बिस्तर देखा,वीरानिया ही नज़र उस तरफ,हमने पलट कर जिधर भी देखा,बहारो के इंतज़ार में सो गए थे हम,आँख खुली तो फिर वही पतझर देखा,अजनबी सा लगा कुछ पल अपना... [पूरी पोस्ट]
writer अंकुर कुमार 'अश्क'

प्यार का बुखार

views
6
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[22 Dec 2009 04:22 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix