जिन्दगी मोहताज नहीं मंजिलों की
जिन्दगी मोहताज नहीं मंजिलों की;वक्त हर मंजिल दिखा देता है ।कुछ बिगड़ता नहीं किसी से बिछुड़कर;क्योंकि वक्त सबको जीना सिखा देता है।तूफान मे किस्ती को किनारे भी मिलते हैं;जहाँ मे लोगों को सहारे भी मिलते हैं।दुनिया में सबसे प्यारी है जिन्दगी;कुछ लोग जिन्दगी...
[पूरी पोस्ट]
अंकुर कुमार 'अश्क'
गज़ल
8
0
0
0
0
[22 Jan 2010 01:03 AM]



Shuffle








