हम पर ये एतबार करो
हम है आप के हम पर ये एतबार करो;ना जाये कहीं और हमे इतना प्यार करो ।हमे चाहिए तुम्हारे साथ चैनो- सुकून ;हमारे दिल को इस तरह न बेकरार करो। अब जाये कहां हम तुम बिन;सितमगर ये सितम हम पर ना बार -बार करो।हमें है आश आज भी की तुम हो हमारे ;अब तुम ही दूर ये हमारा...
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अंकुर कुमार 'अश्क'
गजल
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[03 Feb 2010 10:10 AM]



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