गज़ल
बसायी थी दुनिया प्यार की;वो आज वीरानी हो गयी।चाहा था जिसे जां से ज्यादा ;वो अब वेगानी हो गयी।थी कल तक पागल जो दुनिया के लिए;वो आज दीवानी हो गयी।थी बच्ची जो कल तक;वो शायद शयानी हो गयी।थामा हाथ उसने रकिवों का;उनकी जिन्दगी अब सुहानी हो गयी।करना प्यार की...
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अंकुर कुमार 'अश्क'
गज़ल
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[05 Mar 2010 02:13 AM]



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