आल इज वैल

बर्ग वार्ता - Burgh Vaartaa कुछ न कुछ चलता न रहे तो ज़िंदगी क्या? इधर बीच में काफी भागदौड़ में व्यस्त रहा. न कुछ लिख सका न ज़्यादा पढ़ सका. इस बीच में बरेली के दंगे की ख़बरों से दिल बहुत आहात हुआ. कुल्हाड़ा पीर पर एक बहुत अपनी दुकान भी जलकर राख हो गयी - यूं लगा जैसे दंगाइयों ने मेरे... [पूरी पोस्ट]
writer Smart Indian - स्मार्ट इंडियन
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[16 Mar 2010 17:44 PM]

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