आजादी की पहली सुबह

जिरह जब से दिल्ली आया। घर में अकेला रहने को तरस गया। सोलह मार्च की शाम श्रीमती जी गईं मायके। चैन के सात दिन गुजारूंगा। जब से टिकट कटा, दिन काटने मुश्किल हो गए थे। सत्रह तारीख का बेसब्री से इंतजार करता रहा। सोलह की शाम उन्हें ट्रेन में बैठा, दफ्तर आया। वीकली... [पूरी पोस्ट]
writer अनुराग अन्वेषी
views
18
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
9
[16 Mar 2010 16:24 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix