प्रेम पांचवा पुरुषार्थ है- नामवर सिंह
नई दिल्ली। हिन्दी साहित्य जगत के प्रख्यात आलोचक नामवर सिंह का कहना है कि भले ही ब्राह्मणवादी दर्शन ने जीवन के चार पुरुषार्थ- धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की परिभाषा की है लेकिन एक पांचवा पुरुषार्थ भी है जिसका नाम प्रेम है. यह प्रेम पांचवा पुरुषार्थ है जो भक्ति...
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[16 Mar 2010 13:27 PM]



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