तुम क्यूं

नारी का कविता ब्लॉग तुम क्यूं झेल रही हो पुरूषों को जो नित्य ही मनुष्य के खोल से बाहर आते हैं, अधिकतर पुरूष का भी लबादा नहीं रखते बन जाते है हाड़ मांस के वहषी सिर्फ मादा ही नजर आती है हर नारी जो कभी माँ,बहन-पत्नि होती है, भभूका सा काबिज हो जाता है हर लेता है समस्त... [पूरी पोस्ट]
writer किरण राजपुरोहित नितिला
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[16 Mar 2010 13:30 PM]

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