चेतक की समाधि से -2

Shri Tan Singh, Badmer भाग -१ से आगे ...........यह चेतक की समाधि है | मैंने झुक कर प्रणाम किया | महान चेतक और उसके अद्वितीय मालिक ! तुझे शतश: प्रणाम है और तभी एक गंभीर आवाज का प्रवाह बह चला - " पथिक ! जितना मैंने देखा उतना तुमने सुना भी नहीं | तुम्हारी तरह मेरे भी दिन थे... [पूरी पोस्ट]
writer क्षत्रिय

स्व.श्री तन सिंह जी कलम से

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[16 Mar 2010 10:46 AM]

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