नीम
कागज़ पर कुछ टेढ़ी मढ़ी लकीरेंनक्शे पर नीली, हरी लकीरेंबच्चों के मन में गढ़ गई थीं,आज लकीरें सुलग रही थींबनती बिगड़ती बटोही सीभटक रही थीं।खबर थी,सीमा को कल मोड़ दिया थाआज पहाड़ के उस पार पहुँचा दिया थागुड़्हल के फूल,नीम के पेड़़,कल छज्जू मियाँ की खपरैल औरअहाते...
[पूरी पोस्ट]
रजनी भार्गव
16
1
0
1
4
[16 Mar 2010 10:18 AM]



Shuffle








