हरीश प्रकाश गुप्त के हाइकू

मनोज हाइकू-- हरीश प्रकाश गुप्तभरा उदधिहुआ मधु विस्‍फोटफूटी कविता । उतर गईअन्‍तस में, नैननपढ़ कविता । मेरी कवितामेरे मन का गीतसुर संगीत रात निठल्‍लीसोई, दिन ने थकबेबस ढोई । अचल बिंदुके इर्द-गिर्द घूमरहा बेसूध । गली-गली मेंघूमा, ठहरा, सोचालेकिन कहॉं? कुत्ता ले... [पूरी पोस्ट]
writer करण समस्तीपुरी

काव्य-प्रसून

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[16 Mar 2010 09:00 AM]

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