कल्पना के घोड़े पर सवार, पत्रकार

जोगलिखी कल राजदीप सरदेसाई की ट्विट, फिर उस पर टिप्पणी और उसका जवाब, यह सब मिला कर एक बात बनी कि संपादक भले ही बीक गए हो, आम पत्रकार अभी भी ईमानदार है. मुझे लगता है कि यह ईमानदारी वाली बात भी एक भ्रम ही है. जब पत्रकार पैसे के लिए न भी बिके अगर वह पूर्वाग्रह [...]... [पूरी पोस्ट]
writer संजय बेंगाणी
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[16 Mar 2010 08:44 AM]

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