मुक्तक 3
जीवन का मधुर गीत सुनाती हूँ तुम्हेंसोए हो तो सोते से जगाती हूँ तुम्हेंजो ढूँढने निकलेगा सो पाएगा वहीइक बात पते की यह बताती हूँ तुम्हेंक्यों बात कोई मनकी सुनाने आएक्यों घाव कोई अप्ने दिखाने आएक्यों आप ही हम हाल न पूछें उसकाक्यों हमको कोई हाल अपना बताने...
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डा.मीना अग्रवाल
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[19 Oct 2008 05:20 AM]



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