मुक्तक 5

Tamatar जीवन का सरोकार न जाने देनाअच्छे जो हों आसार न जाने देनाइक लम्हे में सदियों के छिपे हैं संकेतइक लम्हे को भी बेकार न जाने देनाअंधे के लिए दिन का उजाला बेकारसाहस न हो चलने का तो रस्ता बेकारविश्वास अगर खुद पर नहीं है तुमकोइस हाल में आँखों पर भरोसा... [पूरी पोस्ट]
writer डा.मीना अग्रवाल
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[19 Oct 2008 05:48 AM]

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