सृष्टि के गर्भाधान का उत्सव गुड़ी पड़वा

अस्तित्व फागुन के गुजरते-गुजरते आसमान साफ हो जाता है, दिन का आँचल सुनहरा, शाम लंबी, सुरमई और रात जब बहुत उदार और उदात्त होकर उतरती है तो सिर पर तारों का थाल झिलमिलाने लगता है। होली आ धमकती है, चाहे इसे आप धर्म से जोड़े या अर्थ से... सारा मामला आखिरकार मौसम और मन... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. अमिता नीरव
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[16 Mar 2010 00:56 AM]

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