ये आंसू ही है.........
देवेश प्रताप आँखों में एक अहसास का जन्म होता पानी की बूंदों जैसा होता है,छलक आती है ये बूंदे
जब मन रो पड़ता है,
निकल आती है बूंदे ये तब
जब खुशियों का मेला होता है ,
सारे दर्दों को समेट कर
एक बूंद बन जाती है ,
बिखर जाती है ये बूंदे
आँखों से विदा होकर ,इन...
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देवेश प्रताप
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[16 Mar 2010 00:02 AM]



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