एक प्याली चाय
एक प्याली चाय,अक्सर मेरे,भोर के सपनों को तोड़,मेरी अर्धांगिनी,के स्नेहिल यथार्थ की,अनुभूति कराती है॥एक प्याली चाय,अक्सर,बचाती है,मेरा मान, जब,असमय और अचानक,आ जाता है,घर कोई॥एक प्याली चाय,अक्सर,बन जाती है,बहाना,हम कुछ ,दोस्तों के,मिल बैठ,गप्पें हांकने...
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अजय कुमार झा
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[15 Mar 2010 23:26 PM]



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