गुडी पाडवा 2010
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा आई वन्दनवार सजाओ कोयल के कूक पंचम में सूर से सूर मिलाओ श्रीखंड का स्वाद लो और चैती गुनगुनाओ स्वप्नों की टोकरी में एक नया स्वप्न सजाओ रह गए है जो अधूरे संकल्प फिर दोहराओ ग़मों के पार जाओ खुशियाँ अपनाओ प्यार की मिठाइयाँ बांटो नूतन वर्ष...
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Salil Datey
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[15 Mar 2010 22:52 PM]



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