बस यही मुश्किल है

DREAM प्रस्तुत है एक और पुरानी लिखी रचना.  बस यही मुश्किल है तोड़ दूं कसमें तमाम, और वादे भूल जाऊंबस यही मुश्किल है मेरी , कैसे मैं उसको भुलाऊंमुझसे ज्यादा कीमती हैं अश्क मेरे यार केहै अभी नादान मेरा यार क्यूँ उसको रुलाऊंकोई सब कुछ जानते भी जब बने... [पूरी पोस्ट]
writer योगेश स्वप्न
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[15 Mar 2010 21:45 PM]

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