नवसंवत्सर पर प्रार्थना
आ नो भद्रा: क्रतवो यंतु विश्वत:। संगच्छध्वं संवदध्वं संवो मनांसि जानताम देवा भागं यथा पूर्वे संजानाना उपासते समानीव आकू पि: समाना हृदयानि व: समानमस्तु व मनो यथा व: सुसहासति। ...
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गिरिजेश राव
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[15 Mar 2010 21:04 PM]



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