आसमान कुछ है उदास सा
आसमान कुछ है उदास साकुछ चुप चुप है आज चांदनीहर्फ़ बहुत धुंधले से दीखतेसुर खो बैठी आज रागिनीकोई बैठा है गुमसुम सारूठा है कुछ है उदास सादूर बहुत है पहुँच से मेरीफिर भी लगता बहुत पास साघुटनों पर अपना सर रखकरबैठा होगा कही अकेलाबाहर होगी भरी दुपहरीमन के अन्दर...
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ranjana
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[15 Mar 2010 16:44 PM]



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