साहिर की अंतरंग की पीडा़ का क्रंदन- जिन्हे नाज़ है हिंद पर वो कहां है..
साहिर लुधियानवीकडी़ २पिछली पोस्ट पर आपकी टिप्पणियों के लिये शुक्रिया अदा करता हूं, क्योंकि वह पोस्ट काफ़ी समय बाद लिखी गयी थी,और लगा था कि आप मुझे भूल गये होंगे. (ऐसे ये हक है आपको, मेरे बात और है, मैने तो मुहब्बत की है).मेरे मित्र OLD MONK नें फ़रमाया...
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दिलीप कवठेकर
मोहम्मद रफ़ी
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[15 Mar 2010 15:40 PM]



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