एक पक्षी के साथ सुबह

कर्मनाशा * आज की सुबह एक पक्षी के साथ हुई। अपनी बैठक का परदा जब धीरे से सरकाया तो खिड़की के बाहर गमले का निरीक्षण करते हुए एक पाखी को पाया।* रूप - रंग का क्या करूं बखान ! कमरे के भीतर से ही मोबाइल से खींची गईं दो तस्वीरें हाजिर हैं श्रीमान !*मन में आया है अभी कुछ... [पूरी पोस्ट]
writer sidheshwer

कविता

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[15 Mar 2010 14:31 PM]

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