प्यास बुझा लें, फिर कर लेंगें धरम-करम की बातें

सुराही प्यास बुझा लें, फिर कर लेंगें धरम-करम की बातेंजाम ज़रा छलकाकर कर लें, आ, ज़मज़म की बातेंदेख ज़रा, सजधजकर दुनिया फैल रही है बाहेंखूब गले मिल ले उससे तू, छोड अदम की बातेंकल तक हमसे आँख मिलाकर छेड रहा था कोईआज अचानक क्यों परदा, क्यों लाज-शरम की बातें ?मूँद ज़रा... [पूरी पोस्ट]
writer मिलिंद / Milind

गज़ल

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[09 Sep 2009 12:21 PM]

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