आयें हैं सो कुछ दिन गुजार जाते हैं

सुराही आयें हैं सो कुछ दिन गुजार जाते हैंलेकर ना जब तक के कहार जाते हैं क्या शानोशौकत पर गुमान करते हो दुनियासे मुफ़लिस ताजदार जाते हैं ना रास्ता अनजाना, न राह मुष्किल हैहर दिन इस दुनियासे हजार जाते हैं जानकरभी के याँ बार बार आना हैजानेवालें क्यों बेकरार जाते... [पूरी पोस्ट]
writer मिलिंद / Milind

गज़ल

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[17 Oct 2009 03:07 AM]

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