वही शाम होगी, वही रात होगी
वही शाम होगी, वही रात होगीवही अजनबीसी मुलाकात होगीअभी स्वप्नभी मैं नहीं देख पायाअभी जागनेकी पुन: बात होगीघडी दो घडी का मिलन है जुदाईमिलें उम्रभर तो अलग बात होगीसमझमें न आए कि पूछू, न पूछूजनाज़ा उठेगा कि बारात होगीअमानत समझकर न लौटाइयेगा'भँवर' दिल दिया है...
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मिलिंद / Milind
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[05 Nov 2009 05:02 AM]



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