शिकस्ता साज़ पर गाने लगी है

सुराही शिकस्ता साज़ पर गाने लगी हैवह दिल के तार सहलाने लगी हैशबिस्ताँमें कहीं गुलशन खिला याहवाको साँस महकाने लगी है?जो कल तक डस रही थी नागिनोंसीपरेशाँ ज़ुल्फ़ सिरहाने लगी हैजलेंगे दिल, तभी होगा उजालामुहब्बत की घटा छाने लगी हैकिये होंगे हज़ारों कत्ल उसनेतभी तस्वीर... [पूरी पोस्ट]
writer मिलिंद / Milind

गज़ल

views
12
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[28 Nov 2009 09:14 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix