तुम न आये, न कासिदो-खत तक
तुम न आये, न कासिदो-खत तकदिल तडपता रहा कयामत तकज़ुल्म चुपचाप क्यों सहें हमने ?अब तो मुमकिन नहीं शिकायत तकअज़लसे हुस्नका अलम दिलपरकर चुके दिलजलें बगावत तकज़ुल्म का दौर है अभी जारीबात पहुँची कहाँ इनायत तक ?साथ देना, चलो, नहीं मुमकिनआप करते नहीं हिमायत तकफिर...
[पूरी पोस्ट]
मिलिंद / Milind
गज़ल
5
0
0
0
0
[16 Nov 2009 03:33 AM]



Shuffle







